महामृत्युंजय जाप
Mahamrityunjay Mantra Jap & Homa
"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥" यह संजीवनी मंत्र भगवान शिव का सबसे शक्तिशाली मंत्र है जो मृत्यु को भी टालने की क्षमता रखता है।
Ujjain (Mahakal)



यह अनुष्ठान क्या है?
महामृत्युंजय जाप का अनुष्ठान विशेष रूप से तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी से पीड़ित हो या उसकी जन्मपत्री में अकाल मृत्यु का योग हो। वैदिक ब्राह्मणों द्वारा सवा लाख (1,25,000) मंत्रों का जाप और दशांश हवन किया जाता है।
महामृत्युंजय जाप कब कराना चाहिए?
- जब कोई परिजन आईसीयू या गंभीर स्थिति में हो
- जन्मपत्री में मारकेश या अकाल मृत्यु का योग हो
- लगातार दुर्घटनाओं का भय बना रहता हो
- असाध्य रोगों से मुक्ति की कामना हो
अनुष्ठान के लाभ
- गंभीर से गंभीर बीमारियों से चमत्कारी रूप से मुक्ति
- अकाल मृत्यु के योग का पूर्ण निवारण
- आयु की वृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति
- भय, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा का नाश
